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जानें 2021 में चैत्र नवरात्रि तिथि, कलश स्थापना का मुहूर्त


Sunday, 11 April 2021
Navratra

नवरात्रि माता की उपासना के 9 दिन के अंदर यदि पूरे दिल और श्रद्धा के साथ माता के नौ रूपों की उपासना की जाए तो मां की विशेष कृपा होती हुई नजर आती है। चैत्र नवरात्रि की बात करें तो साल 2021 के अंदर अप्रैल महीने में 13 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि शुरू होते हुए नजर आएंगे जो कि 22 अप्रैल तक चलने वाले हैं। नवरात्रि के साथ ही यह हिंदू नव वर्ष की शुरुआत भी होगी। हिंदुओं का नया साल शुरू होता हुआ नजर आएगा।

नवरात्रों में माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है और अलग-अलग रूप में मां की पूजा करके अलग-अलग शक्तियों को प्राप्त करने का एक प्रयास किया जाता है। तो आइए सबसे पहले बताते हैं कि नवरात्रों में माता के किन रूपों की पूजा की जाती है- 

 

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नवरात्रों में देवी के नौ रूपों की पूजा

 

13 अप्रैल 2021- प्रथम नवरात्रि में मां शैलपुत्री के रूप की पूजा की जाती है। 

14 अप्रैल 2021- नवरात्रों के दूसरे दिन यानी कि द्वितीय नवरात्रि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। 

15 अप्रैल 2021- नवरात्रों के तीसरे दिन तृतीय दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। 

16 अप्रैल 2021- चतुर्थ दिन माता के कुष्मांडा रूप की पूजा की जाती है। 

17 अप्रैल 2021- नवरात्रों के पांचवे दिन की बात करें तो स्कंदमाता के रूप की पूजा की जाती है। 

18 अप्रैल 2021- नवरात्रों के छठे दिन मां कात्यायनी से विशेष पूजा करके शक्तियां प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। 19 अप्रैल 2021- नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। 

20 अप्रैल 2021- आठवें दिन बात करें तो मां महागौरी की पूजा की जाती है। 

21 अप्रैल 2021- माता के आखिरी दिन नवम दिन सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। 

 

यदि आप नवरात्रों के इन 9 दिनों पर माता की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें- 

 

1। जैसे की माता लक्ष्मी उसी घर में आती है जहां पर साफ सफाई होती हुई नजर आती है। इसलिए घर की साफ सफाई जरूर करें। 

2। स्वास्तिक के निशान को किसी भी शुभ कार्य से पहले बनाया जाता है। इसलिए नवरात्रों के दिन पहले ही दिन घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का निशान जरूर बना लें। 

 

कलश स्थापना मुहूर्त

 

नवरात्रि पर कलश स्थापना का विशेष महत्व बताया गया है। चैत्र नवरात्रि अप्रैल महीने में प्रतिपदा तिथि 12 अप्रैल को रही है इसलिए 12 अप्रैल को प्रातः 8:00 बजे से यह तिथि शुरू होकर 13 अप्रैल को प्रातः 10:16 पर समाप्त हो रही है। कलश स्थापना की बात करें तो 13 अप्रैल को प्रातः 5:45 से प्रातः 9:59 तक और अभिजीत मुहूर्त 11:41 से 12:32 तक रहने वाला है। इन दोनों ही समय है पर कलश स्थापना करना बेहतर रहेगा लेकिन पहला मुहूर्त ज्यादा बेहतर बताया गया है। 

सुबह उठकर अपने दैनिक कार्यों को पूरा करने के बाद कलश स्थापना करें माता की विधि विधान रूप से पूजा अवश्य करें। हमारे इस कलश स्थापना के लेख को अधिक से अधिक शेयर करें।

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