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अंकगणित राशिफल


संख्या 1 से 9 के बीच अंकों की सीमा में न्यूमरोलॉजी काम करती है। प्रत्येक संख्या की अपनी ताकत और कमजोरी होती है। प्रत्येक व्यक्ति एक संख्या द्वारा शासित होता है जो उसके जन्म के समय तय किया जाता है। वह संख्या व्यक्ति के व्यवहार, व्यक्तित्व और कार्य प्रोफ़ाइल को तय करती है। व्यवसाय के बारे में जानकारी, भाग्य वृद्धि की उम्र, सही लोगों के साथ साझेदारी करने के लिए, अपने पति या पत्नी के साथ रिश्ते की गुणवत्ता के बारे में जानकारी इस नंबर के माध्यम से मिल सकती है। ऊपर की जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको अंक ज्योतिष के अनुसार अपना नंबर पता होना चाहिए।

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अंकगणित व्यक्तित्व

अंकगणित के अनुसार, किसी भी महीने के 4, 13 और 22 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति नंबर चार से शासित होते हैं। इसका स्वामी ग्रह है और पढ़े...

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अंकगणित के बारे में


अपनी भविष्यफल को जानने की इच्छा मनुष्य में काफी प्रबल रहती है और ऐसा नहीं है कि भविष्यफल को जानने की इच्छा आज ही इंसान के मन में उठ रही है अगर ऐसा होता तो हजारों सालों पहले ज्योतिष विज्ञान का उदय नहीं हुआ होता। आदि काल से ही मनुष्य के मन में यह इच्छा रही है कि वह अपना भविष्यफल जान सके ताकि उसे इस बात की जानकारी हो जाए कि भविष्य में उसके लिए क्या क्या छिपा है तथा वर्तमान में जो कुछ हो रहा है उसके पीछे कौन से, कारक काम कर रहे हैं।  भविष्यफल जानने की कई विधाएं हैं जोकि हमारे बीच मौजूद हैं जिनमें जन्म कुंडली, प्रश्न कुंडली, रमल शास्त्र, लाल किताब, भृंगु संहिता, हस्तरेखा शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, टैरो और अंकशास्त्र काफी प्रचलित हैं। 

अंक शास्त्र या  अंक ज्योतिष विज्ञान एवं भविष्यफल एक ऐसा विज्ञान है जिसका प्रयोग ऊपर बताई गई सभी विधाओं में किसी ना किसी रूप में अवश्य मिल ही जाता है। अंक शास्त्र से भविष्यफल बताने की यह एक प्रभावी विद्या है जो कि सालों से प्रयोग में आती रही है अंक शास्त्र की मदद से आप ना केवल अपने दैनिक जीवन में बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी मनचाहा लाभ उठा सकते हैं।  अंक शास्त्र में ऐसा बोला जाता है तथा ऐसा माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति की उर्जा उसके सकारात्मक दिशा मिल जाएं तो  वह अपने जीवन में निश्चय ही मनचाही सफलता प्राप्त करता हुआ नजर आता है। अंक शास्त्र की सबसे महत्वपूर्ण व मूलभूत विशेषता यह रही है कि इसमें ज्योतिषशास्त्र की तरह गणित की मुश्किलें नहीं मौजूद है।  अंकशास्त्र से किसी व्यक्ति के भविष्य फल का आंकलन  करने के लिए किसी पंचांग, जन्मपत्री या अन्य वस्तुओं की आवश्यकता नहीं रहती है।  मात्र जातक की जन्म तिथि से सब जानकारी हासिल की जा सकती हैं।

अंक शास्त्र संसार का सर्वाधिक प्राचीन विज्ञान बोला जाता है। अंको का सदैव ही हमारे जीवन से गहरा रिश्ता रहा हैं जैसे शुभ मुहूर्त भी अंक में होता हैं,समय भी अंको में देखा जाता हैं, जन्म तारीख में भी अंक हैं। इसलिए इन अंको का खेल इस ब्रह्मांड में सबसे निराला हैं। आप सोचते रह जाएंगे लेकिन यह अंक आपके जीवन के इर्द-गिर्द अपनी रचना और प्रकर्ति के साथ हमेशा उथल-पुथल करते रहते हैं।  सरल से दिखने वाले यह अंक विचित्र खेल खेलते हैं जिसमें हम और आप विचार ही नहीं करते बल्कि हम इसको इत्तेफाक समझ बैठते हैं। भविष्यफल जानने की यह विधा बेहद ही आसान विधा रही है क्यूंकि बहुत से लोगों को जन्म समय का ज्ञान नहीं होता तो ठीक प्रकार से कुंडली बन पाना सटीक नहीं होता। तब उस स्थिति में अंक विद्या से व्यक्ति के स्वभाव, बुद्धिमता और शक्ति आदि के बारे में आसानी से जाना व समझा जा सकता है। इतना ही नहीं , अंक शास्त्र से व्यक्ति के भविष्य में छिपे रहस्यों से भी पर्दा हटाया जा सकता हैं।

अंकशास्त्र किस तरीके से कार्य करता है 

प्रत्येक व्यक्ति का जन्म अंग्रेजी तारीख में 1 से 31 तारीख के बीच होता है। हर तारीख और डेट में बहुत से अंक होते हैं। इन सभी अंको को अगर अलग-अलग करके देखे तो मालूम होगा कि हरेक अंक या नंबर एक दूसरे से बहुत अलग हैं। अंक शास्त्र या अंक विद्या में इन सभी अंको के लिए नौ ग्रह बताएं गए  हैं। आप जानते हैं क्या यह नौ ग्रह कौनसे हैं ? सबसे पहले ग्रह के बारे में बताते हैं  फिर अंको के बारे में बात करेंगे।  नौ ग्रह-सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु व केतु बताए गए हैं। इन सभी ग्रह किसी न किसी अंक के स्वामी कहलाते हैं जैसे कि सूर्य एक अंक का स्वामी है, चंद्रमा 2 अंक का स्वामी है, बृहस्पति 3 अंक का स्वामी है, राहु 4 अंक का स्वामी है,बुध पांच अंक का स्वामी है, शुक्र 6 अंक का स्वामी होता है, केतु 7 अंक का स्वामी कहलाता है, शनि 8 अंक का स्वामी है और मंगल 9 अंक का स्वामी होता है।  बच्चे के जन्म तारीख से ही एक अंक, खास अंक बनकर उसके जीवन से जुड़ जाता हैं।  वह बच्चा कैसे स्वाभव का होगा, व्यवासय किस क्षेत्र में करेगा तो सफल रहने के आसार बढ़ जायेंगे और भी तमाम तरीके की जिज्ञासा को अंक शास्त्र में शांत किया जा सकता हैं। 

अब बात आती है कि अंकशास्त्र आखिर किस तरीके से काम करता है तो आपको बता दें कि आपका जन्म किस तारीख को हुआ है उन अंगों का जोड़ करने पर एक मूलांक निकल कर आता है यानि कि एक संख्या निकल कर आती है, यदि सही तरीके से जातक के जन्म दिवस की तारीख से मूलांक निकाल लिया जाए तो काफी हद तक मूलांक की मदद से यह जाना जा सकता है कि जातक के गुण कैसे रहेंगे वह किस तरीके का व्यवहार करेगा। 

 

मूलांक कैसे निकालते हैं

 

मूलांक निकालने से पहले यह जानना आवश्यक है कि मूलांक कहते किसे हैं।  मूलांक वह अंक या नंबर होता हैं जो जन्म तारीख के अनुसार बनता हैं। जैसे कि किसी व्यक्ति का जन्म 1 तारीख को हुआ है तो उसको मूलांक 1 हुआ जबकि किसी दूसरे व्यक्ति का जन्म 28 तारीख को हुआ तो भी उसका मूलांक एक ही होगा। सरल शब्दों में कहा जाए तो किसी भी व्यक्ति की जन्म तारीख का जोड़ उसका मूलांक कहा जाता है।  अंक शास्त्र में सिर्फ 1  से 9 अंकों का ही महत्व है जिनके आधार पर अंकुश शास्त्र की रचना की गई है और इन अंकों के अलग-अलग ग्रह स्वामी है। 

आइए आप जानते हैं कि मूलांक कैसे निकाल सकते हैं।  मूलांक निकालने के लिए आप सबसे पहले अपनी जन्म तारीख एक पेपर पर लिखने के बाद ध्यान दें कि आपकी जन्म तारीख में एक अंक आता हैं या फिर 2 अंक आते हैं।  यदि आप की जन्म तारीख किसी भी माह की 1 से 9 तारीख पर आता है आपका मूलांक आपकी जन्म तारीख ही है लेकिन जिन लोगों का जन्म 10 से 30 या 31 तारीख के बीच में हुआ है तो उनको अपनी जन्म तारीख के दोनों अंको को जोड़कर मूलांक निकालना होगा। 

जैसे कि मान लीजिये आपकी जन्म तारीख किसी माह में 7 हैं तो 

0 + 7 = 7

आपका मूलांक 7 हैं 

जबकि किसी व्यक्ति का जन्म  किसी माह में 14 तारीख को हुआ हैं तो 

1 + 4 = 5

तो उस व्यक्ति का मूलांक 5 हुआ। 

ऐसे ही, किसी भी माह और तारीख को जन्मे व्यक्ति के लिए एक मूलांक निश्चित  होता हैं। 

मूलांक       तारीख

 

मूलांक 1 - 1,10,19,28

मूलांक 2 - 2, 11,20,29

मूलांक 3 - 3,12,21,30

मूलांक 4 - 4,13,22,31

मूलांक 5 - 5,14,23

मूलांक 6 - 6,15,24

मूलांक 7 - 7,16,25

मूलांक 8 - 8,17,26

मूलांक 9 - 9,18,27

जन्मतिथि की मदद से अंक शास्त्र में भविष्यफल कैसे जाना जाता है?

कई लोगों को आश्चर्य हो सकता है कि कैसे अंकों के माध्यम से किसी का भविष्य कैसे जाना जा सकता है लेकिन यह सर्व  प्रमाणित है कि अंकों के माध्यम से भी किसी भी व्यक्ति के व्यवहार, व्यवसाय, धन-संपत्ति, वैवाहिक जीवन आदि के बारे में सटीक भविष्यवाणी की जाती रही हैं। क्योंकि हर अंक एक ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है जिसके गुण और अवगुण समय-समय पर असर डालते हैं। जिन ग्रहों की दशा और दिशा व्यक्ति के ऊपर अनुकूल प्रभाव डालती है उस ग्रह की गुण उस व्यक्ति पर असर डालते हैं जबकि ग्रहों की दिशा विपरीत जाने पर व्यक्ति पर उनकी विपरीत प्रभाव भी पड़ते हैं। इसलिए अंक शास्त्र भी भविष्य को लेकर सरल और सटीक तरीके से भविष्यवाणी करता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि व्यक्ति के जीवन पर अंको का हमेशा से एक पहरा रहा है। अंक शास्त्र में अंकों के जोड़ने घटाने के माध्यम से भविष्य में होने वाली घटनाओं का अंदाजा लगाना एक अनूठी विधा हैं।

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